Wednesday, August 21, 2019

दिल्ली: ये हैं यूनीक निकनेम वाले खतरनाक अपराधी

नई दिल्ली ने पकड़ा ''। पुलिस की गिरफ्त में आया '', चूहे ने की थी कब्रिस्तान में हत्या। साउथ दिल्ली में 'चवन्नी' और 'अठन्नी' का खौफ। 'मिर्ची' अब पुलिस के कब्जे में। पुलिस के हाथ लगा 'पऊआ'। फिर से इलाके में 'खुजली' का डर। शातिर दिमाग का है 'हटेला'। '' है पुलिस की नजर में। 'भिंडी' अब तिहाड़ में। ... यह सब पढ़कर बेशक आपको गुदगुदी हो रही हो। मगर इन नामों के पीछे छिपे चेहरों और उनके कारनामों के बारे में सुनेंगे तो हंसी की जगह दहशत में आ जाएंगे। वैसे तो नाम ही किसी की पहचान होता है। चाहे वो अच्छा हो या बुरा। एक नाम घर में मिलता है, जिसे निक नेम कहते हैं। एक नाम वो जिसे लोग जानते हैं। लेकिन, जरायम की दुनिया के कुछ अपने उसूल हैं। जी हां, मुंबईया अंडरवर्ल्ड पर बनी फिल्मों में जैसे आपने नाम सुने होंगे, उसी तर्ज पर दिल्ली के गुंडे, मवालियों, गैंगस्टर्स और गुर्गो के ये नाम हैं। यानी रियल लाइफ के विलेन। इनके 'उर्फ' नामों से ही दिल्ली पुलिस जानती पहचानती है। जिस गली मुहल्ले में दबदबा है, वहां के लोग भी ऐसे नामों से दहशत में रहते हैं। दिल्ली पुलिस के पास ऐसे उपनामों की लंबी फेहरिस्त है। जिसमें वास्तविक नाम छिपाने के लिए रखे गए हैं। दिल्ली पुलिस के डोजियर में ऐसे कई अजब-गजब नामों का खुलासा है। मसलन। चिकना, दिलदिल, भिंडी, हटेला, टुंडा, पउआ, मिर्ची, चूहा, चवन्नी, झींगुर, बक्सा, डिब्बा, खुजली, अठन्नी, चवन्नी, चीनू, नाटा, हड्डी, बाबा मोबाइल, मदारी, गंजेड़ी, गंजा। ऐसे यूनिक नेम हैं कि सुनकर पुलिस भी हंस पड़ती है। मगर इन नामों पर ही संगम विहार, यमुना पार, बाहरी दिल्ली, जहांगीरपुरी, चंद्रावल नगर, दक्षिणी दिल्ली, पुरानी दिल्ली में गैंग खड़े कर लिए। इनके उपनामों के पीछे छिपी हैं, हत्याएं, रंगदारी, लूट, स्नेचिंग, चाकूबाजी, चोरी, रेप, डकैती जैसी दर्जनों संगीन वारदातें। चवन्नी- अठन्नी की जोड़ी 2017 में दक्षिणी पश्चिम जिले के एएटीएस ने सिकंदर उर्फ अठन्नी और अमित उर्फ चवन्नी को गिरफ्तार किया। दोनों ने स्नेचिंग, गाड़ी चोरी की ताबड़तोड़ घटनाओं से पुलिस की नाक में दम कर दिया था। अठन्नी गिरोह का सरगना है। फिल्म 'ओए लकी लकी ओए से प्रभावित रहा। कई बार जेल गया, फिर बाहर आ गया। उसने अमित उर्फ चवन्नी के साथ गिरोह बनाया था। चूहा ने किया था फायर, कब्रिस्तान में हत्या कुछ इसी तरह यमुना पार में छेनू गैंग, नासिर गैंग और अनस गैंग में चली आ रही गैंगवार में दानिश उर्फ चूहा उभरता हुआ बदमाश है। दो साल पहले 'चूहा' ने फायर किया था, फिर फरार हो गया। वेलकम के कर्दमपुरी कब्रिस्तान में 11 जनवरी को चूहा ने ही इस गैंगवार में गैंगस्टर महफूज का मर्डर किया था। स्पेशल सेल के हाथ में 'बारूद' स्पेशल सेल ने पिछले हफ्ते धनंजय उर्फ बारूद को पकड़ा। मुजफ्फरपुर बिहार का रहने वाला है बारूद। इसके खिलाफ लूट, डकैती और स्नैचिंग के 65 मामले दर्ज हैं। इनमें अकेले लूट की 50 वारदातों में यह शामिल रहा है। एनकाउंटर में लंगड़ा हुआ हटेला तिहाड़ में बंद छेनू गैंग का शार्प शूटर अनवर हटेला ने 22 अक्टूबर 2017 की रात जाफराबाद और भजनपुरा में चार घंटे के भीतर दो की हत्याएं कर दी थीं। दनादन गोलियों के सीसीटीवी वीडियो वायरल हुए थे। हटेला को मार्च 2018 स्पेशल सेल ने अमरोहा में जाकर एनकाउंटर किया। पैर में तीन गोली लगीं। अब वो हमेशा के लिए चल फिर नहीं सकता। अनवर तिहाड़ जेल में बंद गैंगस्टर छेनू पहलवान गैंग का शार्प शूटर था। दिल्ली पुलिस अफसर का कहना है कि अपने वास्तविक नाम को छिपाने के लिए बदमाश ऐसा करते हैं। दो चार स्नेचिंग करने के बाद बदमाश अपने गैंग का विस्तार करने लगता है। वह चाहता है कि नाबालिग उसके गैंग में भर्ती हों। इसके लिए सबसे पहले वो ऐसा नाम रखता है जिससे उसकी अलग हटकर पहचान हो। इनके उपनाम से ही पुलिस के पास रेकॉर्ड रहता है।


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