Monday, September 23, 2019

इमरान खान का आतंकवाद पर सबसे बड़ा कबूलनामा, कहा- अल कायदा को पाक आर्मी, ISI ने किया था ट्रेंड

न्यू यॉर्कपाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने माना कि खूंखार आतंकी संगठन की ट्रेनिंग उनके ही देश में हुई थी। यह आतंकवाद पर पाकिस्तान के सबसे बड़े कबूलनामों में एक है। ओसाम बिल लादेन के नेतृत्व वाले आतंकवादी संगठन अल कायदा ने ही 9/11 जैसी भयावह आतकंवादी वारदात को अंजाम दिया था। 9/11 से पहले अल कायदा को ISI ने दी थी ट्रेनिंग: इमरान अमेरिकी थिंक टैंक काउिंसल ऑन फॉरन रिलेशंस (सीएफआर) में इमरान ने कहा कि 11 सितंबर, 2001 को अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले से पहले अल कायदा के आतंकवादियों को पाकिस्तानी आर्मी और आईएसआई ने ट्रेनिंग दी थी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सरकार ने 9/11 की विनाशकारी वारदात के बाद उन आतंकी समूहों के प्रति अपनी नीति बदल ली, लेकिन पाकिस्तानी आर्मी बदलना नहीं चाहती थी। इमरान से पूछा गया था कि अल कायदा चीफ ओसामा बिन लादेन की ऐबटाबाद में मौजूदगी और यूएस नेवी सील्स के हाथों मारे जाने की घटना का पाकिस्तान की सरकार ने जांच क्यों नहीं कराया? इस पर इमरान ने कहा, 'हमने जांच की थी, लेकिन मैं कहूंगा कि पाकिस्तान आर्मी, आईएसआई ने 9/11 से पहले अल कायदा को ट्रेंड किया था। इसलिए, हमेशा लिंक जुड़ते रहे। आर्मी में कई ओहदेदार 9/11 के बाद बदली नीति से सहमत नहीं हुए।' तीन महीने में इमरान का दूसरा बड़ा कबूलनामा अल कायदा और इसके चीफ ओसामा बिन लादेन पर पाकिस्तान की ओर से पिछले तीन महीने में यह दूसरा बड़ा कबूलनामा है। खान ने जुलाई में कहा था कि पाकिस्तान को ओसामा की मौजूदगी का पता था। पाकिस्तान के पीएम ने कहा था कि वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने सीआईए को ओसामा के बारे में बताया था। उसी जानकारी के आधार पर अमेरिका ने उसे ढूंढकर मार गिराया। ओसामा को अमेरिका ने 2 मई, 2011 की आधी रात को बेहद गुप्त ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान में घुसकर मारा था। ISI ने दुनियाभर के मुसलमानों को बुलाकर बनाया आतंकवादी: इमरान ट्रंप की ओर इशारा करते हुए इमरान ने कहा कि वर्ल्ड लीडर यह नहीं समझते हैं कि पाकिस्तान में कट्टरता कैसे आई। उन्होंने कहा, पाकिस्तान ने 1980 में अमेरिका की मदद से सोवियत संघ के खिलाफ जेहाद छेड़ा था। उन्होंने कहा, 'अमेरिका की मदद से ISI ने दुनियाभर के मुस्लिम देशों से आतंकियों को बुलाकर ट्रेनिंग दी ताकि वे सोवियत यूनियन के खिलाफ जेहाद कर सकें।' इमरान ने कहा तब अमेरिकी राष्ट्रपति रॉनल्ड रीगन ने उन्हें वॉशिंगटन बुलाया और उनकी शान में कसीदे पढ़े थे। ...तब अफगानिस्तान से सेना बुला नहीं पाएगा अमेरिका: इमरान तालिबान के साथ बातचीत अचानक रोकने के ट्रंप के फैसले पर इमरान ने कहा कि अफगानिस्तान की समस्या का सैन्य समाधान कभी नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, 'मैंने यही बात 2008 में ओबामा प्रशासन से भी कही थी, लेकिन उन्हें इस पर विश्वास नहीं हुआ। अफगान विदेशी सेना के खिलाफ हमेशा एकजुट होते रहे हैं। पाकिस्तान में लाखों अफगान शरणार्थी हैं। हम अखबारों में ट्रंप द्वारा तालिबान के साथ शांति समझौता रद्द करने के बारे में पढ़ते हैं। यह एक गलती है। मैं जब ट्रंप के साथ मुलाकात में इसकी चर्चा जरूर करूंगा।' उन्होंने आगे कहा, 'आज तालिबान भी मानता है कि वह पूरे अफगानिस्तान पर नियंत्रण स्थापित नहीं कर सकता और न ही अफगान आर्मी पर कब्ज जमा सकता है। राजनीतिक समाधान ही एकमात्र रास्ता है, वरना अमेरिका अपनी सेना वहां से लौटा नहीं सकेगा।'


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