सौमृत भट्टाचार्य, नई दिल्ली ने अक्षरधाम मंदिर के पास पर स्पीड लिमिट के 'उल्लंघन' के लिए काटे गए लगभग 1.5 लाख की जुर्माना राशि नहीं वसूलने का फैसला लिया है। हालांकि, जिनके चालान काटे गए, वे 70 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड लिमिट के अंदर की गाड़ी चला रहे थे। ट्रैफिक पुलिस ने यह फैसला टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के बाद लिया। टीओआई ने बताया था कि स्पीड लिमिट डिटेक्ट करने के लिए इस जगह पर लगाए गए ANPR कैमरे में स्पीड लिमिट 60 किलोमीटर प्रति घंटा सेट की गई है, जबकि निर्धारित सही लिमिट 70 किलोमीटर प्रति घंटा है। अधिकारियों ने कहा है कि 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक की स्पीड से जाने वाले यात्रियों को जुर्माना देने की जरूरत नहीं है। हालांकि, ट्रैफिक पुलिस ने अभी उन लोगों के पैसे वापस करने की कोई योजना नहीं बनाई है, जो इस चालान के लिए जुर्माना दे चुके हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के बाद, कई ऐसे लोग, जिन पर गलत तरीके से जुर्माना लगाया गया था, उन्होंने सीनियर ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों और कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। स्पीड लिमिट डिटेक्ट करने के लिए यह कैमरा निजामुद्दीन ब्रिज के पास लगाया गया था। खास बात यह है कि इसके ठीक नीचे 70 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड लिमिट बताने वाला साइन बोर्ड भी लगा हुआ था। स्पीड लिमिट कम कराने के लिए से संपर्क सूत्रों का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस ने बोर्ड को बदलने और 60 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड लिमिट निर्धारित करने के लिए NHAI से संपर्क किया था। मगर एनएचएआई ने ट्रैफिक पुलिस के इस अनुरोध को ठुकरा दिया, क्योंकि इसी नेशनल हाइवे पर इसी दायरे में अन्य जगह 70 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड लिमिट है। हालांकि, पुलिस ने कहा है कि केवल उन्हीं ड्राइवरों का जुर्माना माफ किया गया है, जिन्हें सितंबर में चालान जारी किया गया है।
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