Tuesday, December 24, 2019

झारखंड में हार के बाद दिल्ली के लिए रणनीति बदलेगी BJP!

नई दिल्ली से ठीक पहले बीजेपी ने झारखंड में सत्ता गंवा दी है। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा सीटें जीतने के बावजूद बीजेपी सरकार नहीं बना पाई, तो हरियाणा में भी पार्टी अपने दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में नाकाम रही। ऐसे में दिल्ली का 21 सालों का वनवास बीजेपी कैसे खत्म कर पाएगी, यह अब पार्टी के सामने बड़ा सवाल बनता जा रहा है। हालांकि पार्टी के कुछ नेता बीजेपी की हार या उम्मीद के मुताबिक जीत ना मिलने के अलग-अलग कारण बता रहे हैं, जिनमें एंटी इनकंबेंसी प्रमुख है, लेकिन पार्टी के दूसरे धड़े के नेताओं का मानना है कि नतीजों से बीजेपी के सामने कम से कम यह तो साफ हो गया है कि राज्यों के चुनावों में जनता अब नैशनल मुद्दों को तरजीह नहीं दे रही है। 2019 के लोकसभा चुनावों में भले ही जनता ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम और काम पर बीजेपी को बहुमत दिया हो, लेकिन विधानसभा चुनावों में ना तो मोदी का जलवा चल पाया और ना पार्टी की रणनीति कोई कमाल दिखा पाई। यही वजह है कि अब दिल्ली बीजेपी अपनी रणनीति पर फिर से विचार करने को मजबूर हो गई है। हालांकि पार्टी ने पिछले दिनों शिक्षा, स्वास्थ्य, दूषित पानी जैसे कई मुद्दे जोरशोर से उठाए और हाल ही में अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की घोषणा भी की, जिसके बाद पार्टी को माहौल अपने पक्ष में बनता दिखा, लेकिन नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों ने अनधिकृत कॉलोनियों के मुद्दे को कहीं ना कहीं दबा दिया। यही वजह थी कि रामलीला मैदान की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने 95 मिनट के भाषण में 70-75 मिनट तक नागरिकता कानून और एनआरसी पर ही बोलते नजर आए, जबकि रैली अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के लिए पीएम का आभार जताने के लिए थी। यही वजह है कि पार्टी नेता लोकल मुद्दों पर ही ज्यादा फोकस करने की बात कर रहे हैं। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी का कहना है कि हर राज्य में चुनाव के अलग-अलग मुद्दे होते हैं। दिल्ली की जनता देख चुकी है कि केजरीवाल सरकार ने 5 साल तक कोई काम नहीं किया और केंद्र की लाभकारी योजनाओं को भी लागू नहीं होने दिया। हमें पूरा विश्वास है कि अब जनता बीजेपी को मौका देगी।


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