नई दिल्ली स्कूल की छुट्टी के बाद सड़क पार कर घर जा रही तीसरी क्लास की एक छात्रा को स्कॉर्पियों ने टक्कर मार दी। स्कॉर्पियो चला रहा शख्स गंभीर हालत में बच्ची को अस्पताल लेकर गया, लेकिन बच्ची को बचाया नहीं जा सका। बाद में पिता ने बच्ची की कर दीं। घटना साउथ दिल्ली के फतेहपुर बेरी थाना इलाके में बुधवार दोपहर को हुई। आरोप है कि युवक बच्ची को सबसे पहले एक प्राइवेट अस्पताल लेकर पहुंचा, जहां अस्पताल ने बच्ची का इलाज करने से इनकार कर दिया। इसके बाद बच्ची को एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। बाद में उसे जमानत मिल गई। पुलिस के अनुसार कोमल (8) परिवार के साथ जौनापुर गांव में रहती थी। परिवार में उसके बिना अब माता-पिता और तीन भाई-बहन हैं। कोमल पास के ही गदईपुर में साउथ एमसीडी के स्कूल में तीसरी क्लास में पढ़ती थी। उसके पिता रामदीन पत्थरों की घिसाई का काम करते हैं। पिता किसी तरह अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। पुलिस ने बताया कि बुधवार दोपहर 1:10 बजे स्कूल की छुट्टी होने के बाद कोमल सड़क पार करके घर जा रही थी। तभी एक स्कॉर्पियो ने कोमल को टक्कर मार दी। स्कॉपियो को सागर नाम का शख्स चला रहा था। सागर जोगी मोहल्ला मांडी गांव का रहने वाला है। वही घायल बच्ची को पहले एक प्राइवेट अस्पताल में गया। उसका आरोप है कि अस्पताल ने जब बच्ची का इलाज करने से इनकार कर दिया, तो वह उसे एम्स के ट्रॉमा सेंटर ले गया, लेकिन बच्ची को बचाया नहीं जा सका। मूलरूप से अमेठी के रहने वाले रामदीन ने बताया कि उनकी लाड़ली तो बच नहीं पाई। फिर सोचा कि वे लोग तो गरीब हैं, किसी को क्या दे सकते हैं। इसके बाद उन्होंने अपनी बेटी की दोनों आंखें दान कर दीं। दूसरी ओर, आरोपी ड्राइवर का कहना है कि गलती किसी की भी हो। इसका फैसला तो अदालत में होगा। उन्होंने इंसानियत के नाते घायल बच्ची को अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया। चाहते तो वह मौके से भाग सकते थे, लेकिन उन्होंने बच्ची की जान बचाने को अधिक तवज्जो दी, लेकिन दुर्भाग्यवश बच्ची बच ना सकी। उन्हें जो भी सजा मिलेगी। उन्हें मंजूर है। लेकिन कम से कम उनके मन में यह ग्लानि नहीं रहेगी कि उन्होंने बच्ची को बचाने की कोशिश नहीं की।
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