प्रियंका सिंह, नई दिल्ली अफवाहों की बीच गुरुवार को भी स्थल पर लोगों का इकट्ठा होना जारी रहा। देखते-देखते ही शाम 4 बजे तक सैकड़ों की संख्या में भीड़ इकट्ठा हो गई। वहीं स्टेज के सामने एक बार फिर बुजुर्ग महिलाओं ने अपना मजमा जमाया। मुजफ्फरपुर से ताल्लुक रखने वाली 70 साल की सन्नो परवीन ने बताया कि वह बिहार से सिर्फ प्रदर्शन में शामिल होने आई हैं। वैसे तो उनका परिवार यही पर रहता है, लेकिन वह अपने गांव में ही रहती हैं। परवीन ने कहा कि जब तक यह कानून वापस नहीं हो जाता है, तब तक हम इसी तरह सड़कों पर रहेंगे। प्रदर्शन पर शामिल 82 साल की बिलकीस ने कहा, 'हिंदुस्तान हमारी पहचान है और इसे हम कैसे छोड़कर जा सकते है। मेरे पास कोई सर्टिफिकेट नहीं है, ना ही मैं ज्यादा पढ़ी लिखी हूं। ऐसे में हम अपनी नागरिकता कैसे साबित करेंगे? जब देश आजाद हुआ था, तभी से इस भारत में हमारे पूर्वज रह रहे है।' बिलकीस ने कहा, 'ठंड से डर से नहीं लगता, सरकार की नीतियों से डर लगता है कि कब वह हमारे ही घर से बेदखल कर दें, कुछ पता नहीं है। अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए हम सड़कों पर रहेंगे, जब तक कि हमारी बात नहीं मान ली जाती है।' 80 साल की इशरत जहां ने कहा, ‘मेरे पूर्वजों ने आजादी की लड़ाई लड़ी और अब हम आजाद देश में अपनी आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं। क्योंकि आज हमसे नागरिकता प्रमाण मांगा जा रहा है। जबकि हमारे बच्चे हर तरह के टैक्स भी देते हैं और हर चुनाव में हम वोट देने भी जाते हैं। वोट मांगने से पहले हमसे नागरिकता का प्रमाण मांगना चाहिए था। लेकिन अब सिर्फ अपनी राजनीति के लिए आवाम का प्रयोग कर रहे हैं।' शाहीन बाग में बाकी दिनों की तरह प्रदर्शन चल रहा था, लोग स्टेज पर आ रहे थे और अपनी बात रख रहे थे। लेकिन दोपहर के 2 बजे के करीब स्टेज से प्रदर्शन को दो दिनों के लिए स्थगित करने का ऐलान हुआ। तभी प्रदर्शन स्थल पर कुछ देर के लिए अफरातफरी मच गई। मगर 3 बजे के बाद दोबारा प्रदर्शन स्थल पर महिलाएं पहले की तरह बैठीं और सीएए-एनआरसी के विरोध में नारे लगाना शुरू कर दिया। इसके साथ ही स्टेज पर बैठे चेहरे भी बदल गए। जहां पहले यह प्रदर्शन आईआईटी के दो छात्रों द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा था। वहीं अब इस प्रदर्शन को लोकल लोगों ने आगे जारी रखने का निर्णय लिया है। स्टेज पर मौजूद शाजिद मुजीब ने कहा, इतने दिनों से हमारे घर की महिलाएं दिन-रात सड़कों पर बैठी हैं, बिना हम लोगों से बात किए कुछ लोग इस प्रदर्शन को खत्म करना चाहते थे। लेकिन जब तक सरकार अपना काला कानून वापस नहीं ले लेती, तब यह प्रदर्शन जारी रहेगा। अगर पुलिस हमें पर लाठी चार्ज भी करती है, तो हम उसके लिए भी तैयार हैं। वहीं इस प्रदर्शन का अब तक नेतृत्व कर रहे छात्र शरजील इमाम ने कहा कि गुरूवार को शाहीनबाग रोड के चक्का जाम को राजनैतिक पार्टियों के गुंडों द्वारा हिंसा की आशंका और आंदोलन के राजनीतिकरण से बचने के लिए वापस लिया गया है। केंद्र सरकार पुलिस को बीच में न लाकर बीजेपी के लोगों के साथ हिंसा कराना चाहती थी। जिसको देखते हुए हमने 20वें दिन आंदोलन को वापस लिया है। इस आंदोलन को दूसरे चरण में ले जा रहे हैं, और हमारी कोशिश रहेगी कि हॉन्ग-कॉन्ग की तर्ज पर फ्लैश मॉब करें।
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