शंकर सिंह, नई मौजपुर में क्लिनिक चलाने वाले एक बीयूएमस कोरोना से पीड़ित हो गए हैं। उनका दावा है कि वह किसी विदेशी से नहीं मिले और न परिवार में कोई विदेश से आया है। उन्हें लगता है कि मोहनपुरी के मोहल्ला क्लिनिक के डॉक्टर से इलाज कराने वाला कोई मरीज उनके क्लिनिक आया, जिससे वायरस उन तक आ गया। अब सवाल है कि जिस मरीज से यह वायरस यूनानी डॉक्टर के भीतर आया है, वो मरीज कहां है? जिला प्रशासन के अफसरों की डॉक्टर की तरफ से दी जानकारी के मुताबिक, मोहल्ला क्लिनिक के डॉक्टर कोरोना होने की जानकारी 22 मार्च को सामने आई तो उन्होंने खुद को क्वारंटीन कर लिया। डॉक्टर को 24 मार्च सुबह 106 डिग्री था तो खुद ही दवाई ली। शाम यह बुखार 99 डिग्री रह गया। इसके साथ ही उन्होंने खुद को क्वॉरंटीन कर लिया। जब 25 मार्च को भी बुखार नहीं उतरा तो परिजनों ने कोरोना टेस्ट कराने की सलाह दी। डॉक्टर ने जिला प्रशासन से संपर्क कर स्क्रीनिंग कराने की गुजारिश की। वह 25 मार्च दोपहर को जीटीबी अस्पताल आए और अपना सैंपल दिया। दोबारा घर आकर क्वारंटीन हो गए। जीटीबी अस्पताल और जिल प्रशासन की तरफ से उन्हें 29 मार्च की रात को पॉजिटिव आने की कॉल आई तो वह रात करीब 11 बजे जीटीबी अस्पताल आ गए। मौजपुर में 17 साल से प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर का दावा है कि 20 और 21 मार्च को क्लिनिक में आए किसी मरीज से यह वायरस उनके भीतर आया है। यह मरीज मोहनपुरी स्थित मोहल्ला क्लिनिक में गया होगा और वहां से ठीक नहीं होने पर उनके यहां आया होगा। 47 डॉक्टर के पत्नी और 6 बच्चे हैं, जिनमें 4 बेटियां और 2 बेटे हैं। उनकी उम्र 23 से 5 साल के बीच है। फिलहाल डॉक्टर के परिजन स्वस्थ हैं। डॉक्टर का बुधवार को दोबारा सैंपल लिया गया है। दिलशाद गार्डन की एक महिला सऊदी अरब से आई थी, जिससे कोरोना वायरस मौजपुर के मोहनपुरी स्थित मोहल्ला क्लिनिक के डॉक्टर तक पहुंचा था। इसके बाद वेलकम की जनता कॉलोनी के मोहल्ला क्लिनिक की डॉक्टर उनकी पत्नी और उनकी बेटी भी पॉजिटिव आ गईं। प्रशासन ने 12 से 18 मार्च तक मोहनपुरी के मोहल्ला क्लिनिक में इलाज कराने आए सभी लोगों से होम क्वारंटीन होने की सलाह दी है। इनकी तादाद करीब 900 बताई जा रही है।
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