Wednesday, June 17, 2020

Coronavirus: WHO ने फिर हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्वीन ट्रायल बंद किया

जेनेवा विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक बार फिर कोरोना वायरस के इलाज के लिए मलेरिया की दवा हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्वीन (HCQ) के सॉलिडैरिटी ट्रायल को बंद कर दिया है। ट्रायल के कार्यकारी समूह और मुख्य जांचकर्ताओं ने यह फैसला सॉलिडैरिटी ट्रायल, ब्रिटेन के रिकवरी ट्रायल और दूसरे सबूतों को देखते हुए किया। इससे पहले सांइस जनर्ल 'द लैंसेट' में छपी एक स्टडी के बाद HCQ के ट्रायल पर रोक लगा दी गई थी लेकिन बाद में रोक हटा भी दी गई और वह स्टडी भी वापस ले ली गई थी। मृत्युदर पर असर नहीं WHO का कहना है कि सॉलिडैरिटी ट्रायल और ब्रिटेन के रिकवरी ट्रायल के नतीजों में HCQ से COVID-19 के मरीजों में मृत्युदर कम होता नहीं पाया गया। इसलिए अब सॉलिडैरिटी ट्रायल के तहत और लोगों पर HCQ को टेस्ट नहीं किया जाएगा। जिन लोगों पर पहले से HCQ का कोर्स पूरा कर सकते हैं या फिजिशन की सलाह पर खत्म भी कर सकते हैं। सिर्फ सॉलिडैरिटी ट्रायल पर रोक संगठन ने साफ किया है कि यह फैसला सिर्फ सॉलिडैरिटी ट्रायल से जुड़ा है और मरीजों को इन्फेक्शन से पहले या बाद में इसे देने पर रोक नहीं लगाई गई है। इससे पहले लैंसेट की स्टडी में दावा किया गया था कि HCQ की वजह से मरीजों में मृत्युदर बढ़ जाता है। इसके बाद WHO ने दवा की टेस्टिंग पर रोक लगा दी थी। पहले भी लगी थी रोक WHO के इस फैसले का काफी विरोध हुआ था। भारत ने भी WHO को खत लिखकर कहा था कि ऐसा फैसला करने से पहले भारत के ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) से भी बात करनी चाहिए थी। भारत में सबसे ज्यादा कंपनियां HCQ बनाती हैं और अमेरिका की अपील पर भारत ने इसके निर्यात से बैन हटा लिया था। वहीं, दूसरे वैज्ञानिकों का कहना था कि WHO के टेस्ट पर बैन लगाने से उन्हें अपनी स्टडी के लिए वॉलंटिअर्स नहीं मिल रहे हैं।


from Rest of Europe News in Hindi, बाकी यूरोप समाचार, Latest Rest of Europe Hindi News, बाकी यूरोप खबरें https://ift.tt/2CiuFWc