Friday, October 23, 2020

चीन की आक्रामकता से निपटने के लिए भारत जैसे पार्टनर के साथ काम करना जरूरी: अमेरिका

वॉशिंगटन हिमालय से लेकर दक्षिण चीन सागर तक, चीन की बढ़ती आक्रामकता से आधी दुनिया परेशान है। इसे देखते हुए यह अहम है कि एक जैसे विचारों वाले देश, जैसे भारत के साथ मिलकर काम किया जाए। यह कहना है अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों का। पहले से ही चीन की चुनौती से निपटने के लिए 'Quad' देशों के बारे में चर्चा तेज है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल के विस्तार का प्लान नहीं है। एक अधिकारी ने बताया है, 'Quad समिट के बारे में निकट भविष्य में इसे लेकर कोई प्लान नहीं लेकिन भविष्य में कुछ भी हो सकता है।' गौरतलब है कि अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पिओ और रक्षा मंत्री मार्क एस्पर अगले हफ्ते भारत आएंगे। अमेरिका के विदेश मंत्री () तीसरी भारत-अमेरिका 2+2 वार्ता के लिए नई दिल्ली आएंगे। एक महीने में दूसरा दौरा यह एशिया में एक महीने के अंदर उनकी दूसरी ट्रिप है। इस दौरे पर वह मालदीव, श्रीलंका और इंडोनेशिया भी जाएंगे। वहीं, भारत ने हमेशा यह रुख कायम रखा है कि उत्तर से लेकर पूर्वोत्तर तक में सीमा विवाद सुलझाने और सेना को पीछे करने की जिम्मेदारी चीन की है। 6 राउंड की सैन्य वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने कई फैसलों का ऐलान भी किया है। इसके तहत तय किया गया है कि फ्रंटलाइन पर और सैनिक नहीं भेजे जाएंगे। साथ ही, किसी भी तरह से यथास्थिति में एकपक्षीय बदलाव नहीं किया जाएगा। अहम सैन्य समझौते पर रहेगी नजर भारत अमेरिका के साथ एक ऐसा सैन्य समझौता करने जा रहा है, जिसके तहत उसे यूएस के सैटेलाइट डेटा का एक्सेस मिल जाएगा। सैटलाइट डेटा की मदद से मिसाइलें और ड्रोन और सटीक हमले कर सकेंगे। दरअसल, भारत इस मामले में चीनी सेना की बढ़त को पाटना चाहता है। एलएसी पर चीन के साथ जबरदस्त तनाव के बीच यह भावी समझौता और ज्यादा अहम हो गया है। उम्मीद की जा रही है कि अगले हफ्ते होने वाली इस बैठक में इस समझौते का ऐलान किया जाएगा।


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