आज बॉलिवुड में फराह खान ( ) वह नाम है जिन्हें किसी परियर की कोई जरूरत नहीं है। फराह खान आज 9 जनवरी को अपना 57वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रही हैं और आज हम आपको सुनाने जा रहे हैं उनके उस सफर का किस्सा जो जमीन से शुरू होकर आसमान की ऊंचाइयों तक पहुंचा। और इन सबके पीछे फराह खान की मेहनत ही है, जो उन हजारों लाखों लोगों के लिए एक प्रेरणा हैं जो इंडस्ट्री में कुछ न कुछ करने और बनने का ख्वाब लेकर मुंबई तक आते हैं। फराह ने बचपन में वह दुख देखा है, जिसकी शायद सभी कल्पना भी न कर सकें। आज टॉप डायरेक्टर्स और कोरियॉग्रफर की लिस्ट में शामिल फराह इंडस्ट्री की सबसे बुलंद हस्तियों में से हैं। फराह ने कहा- हम रातों-रात गरीब हो गए फराह खान ने यहां तक पहुंचने के लिए काफी स्ट्रगल किया है और अपने एक इंटरव्यू में (इंदू मिरानी से बातचीत) उन्होंने यह किस्सा भी सुनाया। हालांकि, ऐसा नहीं था कि फराह की फैमिली शुरू से ही आर्थिक तंगियों में जी रही थी। सच यह है कि पहले फराह की फैमिली काफी अमीर हुआ करती थी, लेकिन वक्त ने उन्हें काफी ठोकर दिया। अपने एक इंटरव्यू में फराह ने सुनाया था, 'पांच साल तक मेरा बचपन काफी खूबसूरत रहा। मेरे पापा काफी अमीर हुआ करते थे, हम पार्टीज़ किया करते थे, स्टार्स घर आया करते थे, लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि सब पलट गया। मेरे पापा डायरेक्टर, प्रड्यूसर और ऐक्टर हुआ करते थे... लेकिन बी-ग्रेड मूवीज़ के। इसके बाद ए-ग्रेड मूवीज़ बनाने की कोशिश में उन्होंने अपना सारा पैसा प्रॉजेक्ट में लगा दिया। ...और यकीन मानिए, हम रातों-रात गरीब हो गए। क्योंकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से पिट गई। इसके बाद हमें 15 साल तक लंबा स्ट्रगल करना पड़ा।' केवल 500 स्क्वायर फीट का फ्लैट रह गया फराह ने बताया कि उनका ग्रामोफोन, मां की जूलरी...सब कुछ खत्म हो गया और उनके पास केवल 500 स्क्वायर फीट का फ्लैट रह गया, वह भी इसलिए कि वह उनकी मां के नाम पर था और उनके पिता उस प्रॉपर्टी को बेच नहीं सकते थे। स्कूल में छिपाया करती थीं सच फराह ने बताया कि कैसे बचपन में उनका पूरा परिवार स्टोरेज रूम में रह रहा था और स्कूल में वह ये जताया करती थीं कि सबकुछ अब भी उतना ही शानदार है। डेथ के समय पापा की जेब में केवल 30 रुपये फराह ने बताया कि जब उनके पिता की डेथ हुई थी तब उनके पॉकेट में केवल 30 रुपये थे। फराह ने उस दर्द को बयां करते हुए कहा था, 'आज जब लोग मुझसे ये कहा करते हैं कि मैं प्रिविलेज्ड बैकग्राउंड से हूं तो दिल करता है कि उसे एक जोर का थप्पड़ लगाऊं क्योंकि तब केवल मेरे पास 30 रुपये थे। मै उनके फ्यूनरल के लिए पैसे मांगने के लिए इधर-उधर भाग रही थी।' फिल्म अर्जुन से देखा डायरेक्टर बनेन का ख्वाब पिंकविला से बातचीत में कोरियॉग्राफर से डायरेक्टर बनने का कहानी का जिक्र करते हुए फराह ने कहा, 'जब मैंने फिल्म अर्जुन देखी तभी मुझे लग गया कि मैं फिल्ममेकर बनना चाहती हूं। हालांकि, डायरेक्टर बनने में मुझे 10-12 साल लगे। मैं डायरेक्चर तब से बनना चाहती थी जब मैं 20 साल की थी, लेकिन मैंने पहली फिल्म तब बनाई जब मैं 39 साल की थी।'
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