नेता जी के साथ मेरे अनगिनत संस्मरण हैं। खट्टे-मीठे दोनों, पर मीठे ज़्यादा हैं खट्टे कम और खट्टे भी ऐसे जिनमें तल्ख़ी नहीं अपनापन होता था।
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