Monday, February 10, 2020

दिल्ली चुनाव के नतीजे तय करेंगे BJP का 'भविष्य'

नई दिल्ली को लेकर बीजेपी नेताओं का दावा है कि एग्जिट पोल्स पूरी तरह गलत साबित होंगे और सरकार बीजेपी की ही बनेगी। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी नेताओं को जहां 45 से 48 सीटें जीतने की उम्मीद है, वहीं संगठन के लोगों का आंकलन है कि पार्टी से 35 से 38 सीटें मिल सकती हैं, जबकि तमाम न्यूज चैनलों के एग्जिट पोल में बीजेपी को कम से कम 2 और अधिकतम 26 सीटें मिलती दिखाई गई थी। ऐसे में ऊंट किस करवट बैठेगा, यह जानने की बेचैनी हर किसी को है। अगर 10 से कम सीटें मिलीं तो?कुछ एग्जिट पोल्स में बीजेपी को 10 से भी कम सीटें मिलती दिखाई गई हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह बीजेपी के लिए एक बहुत बड़ा झटका होगा और पूरे देश में यह मेसेज जाएगा कि नरेंद्र मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा और मनोज तिवारी समेत बीजेपी के तमाम नेताओं द्वारा पूरी ताकत झोंक दिए जाने के बाद भी बीजेपी चुनाव नहीं जीत पाई। साथ ही सीएए, एनआरसी, सर्जिकल स्ट्राइक और शाहीन बाग के धरने जैसे मुद्दों को दिल्ली की जनता ने जरा भी तवज्जो नहीं दी और बीजेपी ध्रुवीकरण करने में कामयाब नहीं हो पाई। इससे दिल्ली में ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी बीजेपी की स्थिति और कमजोर हो जाएगी। अगर 25 से 30 सीटें मिलीं तो?एग्जिट पोल्स में बीजेपी को अधिकतम 26 सीटें मिलती दिखाई गई हैं। ऐसे में अगर बीजेपी 25 या 30 सीट जीत जाती है, तो बड़ी रोचक स्थिति पैदा हो सकती है। फिर यह देखने वाली बात होगी कि बीजेपी किसी तरह की जोड़तोड़ करके या आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के विधायकों के बीच कोई सेंध लगाकर सरकार बनाने की कोई कोशिश करती है या नहीं। अगर 30 सीटें जीतने के बावजूद बीजेपी सरकार नहीं बना पाती है, तो यह पार्टी के एक निराशाजनक स्थिति जरूर रहेगी, लेकिन दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की स्थिति जरूर पहले से काफी मजबूत हो जाएगी। साथ ही पार्टी अपनी साख बचाने में भी काफी हद तक कामयाब हो सकेगी। यह आम आदमी पार्टी के लिए भी एक झटका होगा। अगर 50 से ज्यादा सीटें जीते तो?बीजेपी नेताओं का दावा है कि दिल्ली में बीजेपी की सरकार बनेगी। कोई 45 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा कर रहा है, तो कोई 48 और कोई 50 से ज्यादा सीटें मिलने की बात कह रहा है। अगर सचमुच ऐसा होता है और बीजेपी को बंपर जीत मिलती है, तो बीजेपी के राष्ट्रवादी अजेंडे को काफी मजबूती मिलेगी और देशभर में यह संदेश जाएगा कि सीएए और एनआरसी जैसे मुद्दों पर आम जनता बीजेपी के साथ खड़ी है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर अमित शाह की और दिल्ली में प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर मनोज तिवारी का कद भी बढ़ेगा। बीजेपी जहां दो दशकों के बाद दिल्ली में अपनी सरकार बनाने में कामयाब रहेगी, वहीं आम आदमी पार्टी के सामने अस्तित्व बचाने का सवाल खड़ा हो जाएगा।


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