Monday, July 13, 2020

अयोध्या पर दिए बयान पर अपने ही घर में घिरे ओली, थापा बोले- भारत-नेपाल संबंधों को खराब करना चाहते हैं

काठमांडू नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भगवान राम के जन्मस्थान को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। इसके बाद ओली अपने ही घर पर घिर गए हैं। नेपाल के कई नेताओं ने खुलकर ओली के इस बयान का विरोध किया है। नेताओं ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच वैसे भी तनाव की स्थिति बनी हुई है ऐसे में कोली को ऐसे दावों से बचना चाहिए। ओली ने किया बेबुनियादी दावाओली अपनी सत्ता को जाते हुए देख लगातार भारत पर निशाना साध रहे हैं। सोमवार को उन्होंने दावा किया कि भारत ने सांस्कृतिक अतिक्रमण के लिए नकली अयोध्या का निर्माण किया है। जबकि, नेपाल में है। ओली पहले कह चुके हैं कि भारत उनको सत्ता से हटाने की साजिश रच रहा है। ओली ने सवाल किया कि उस समय आधुनिक परिवहन के साधन और मोबाइल फोन (संचार) नहीं था तो राम जनकपुर तक कैसे आए? राष्ट्रीय प्रजातांत्री पार्टी के सह-अध्यक्ष कमल थापा ने कहा कि प्रधानमंत्री के लिए इस तरह के निराधार, अप्रमाणित बयानों से बचना चाहिए। थापा ने ट्वीट किया, "ऐसा लग रहा है कि पीएम तनावों को हल करने के बजाय नेपाल-भारत संबंधों को और खराब करना चाहते हैं।" इसी तरह, राष्ट्रीय योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष स्वर्णिम वागले ने चेतावनी दी कि भारतीय मीडिया कल पीएम के बयान से विवादास्पद सुर्खियां बटोर सकता है और बना सकता है। सोशल मीडिया यूजर्स प्रधानमंत्री के अयोध्या बयान की खबरों पर टिप्पणी करते रहे हैं। कुछ हास्यास्पद, कुछ इसे हल्के में ले रहे हैं, जबकि कुछ गंभीरता से दावों पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, पीएम ने इस घटना का उल्लेख किया था कि कई बुद्धिजीवी यह कहने के लिए उनका मजाक उड़ाएंगे कि राम नेपाल के थे। नेपाल पर सांस्कृतिक रूप से किया गया अत्याचारनेपाली कवि भानुभक्त आचार्य की 206वीं जयंती पर प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास ब्लूवाटर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नेपाल पर सांस्कृतिक रूप से अत्याचार किया गया है। ऐतिहासिक तथ्यों को भी तोड़ा मोड़ा गया है। हम अब भी मानते हैं कि हमने भारतीय राजकुमार राम को सीता दी थी। केपी ओली के इस्तीफे की मांग तेजनेपाल में कई दिनों से केपी ओली के इस्तीफे की मांग उठ रही है। बजट सत्र को स्थगित करने के बाद अब केपी ओली एक अध्यादेश लाकर पार्टी को तोड़ सकते हैं। सूत्रों से हमारे सहयोगी अखबार इकनॉमिक टाइम्स को जानकारी मिली है कि ओली वहां मुख्य विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस के संपर्क में हैं, जिनसे उन्हें सपॉर्ट मिल सके। दरअसल, ओली अध्यादेश लाकर पॉलिटिकल पार्टीज ऐक्ट में बदलाव कर सकते हैं। इससे उन्हें पार्टी को बांटने में आसानी होगी। यह सब चीन और पाकिस्तान के समर्थन से हो रहा है।


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