विशेषज्ञ समिति ने कहा कि तालिबान को उन हत्याओं के लिए जिम्मेदार बताया गया है, जोकि हिंसा का प्रतीक बन गई है। इनमें सरकारी अधिकारियों, महिलाओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों एवं अन्य को निशाना बनाया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार ‘‘ये हमले सरकार की क्षमता को कमजोर करने और नागरिक समाज को डराने धमकाने के इरादे’’ से किए गए प्रतीत होते हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को सौंपे 22 पन्नों की रिपोर्ट में समिति ने कहा कि अमेरिका और नाटो के सैनिकों की 11 सितंबर (2001 में अमेरिका पर आतंकवादी हमले की बरसी) तक वापसी से अफगान बलों के लिए ‘‘बेहद कम ड्रोन और रडार तथा निगरानी क्षमता के कारण हवाई अभियानों को सीमित करने, कम साजो सामान एवं हथियार के साथ सुरक्षा अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण’’ होगा।
वर्ष 2001 में अमेरिका के नेतृत्व में गठबंधन सेना ने 11 सितंबर के आतंकवादी हमले के दोषी ओसामा बिन लादेन को पनाह देने वाले तालिबान को अफगानिस्तान से उखाड़ फेंका था।
एपी सुरभि पवनेश
पवनेश
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