हेलसिंकी बाल्टिक सागर में रूस की बढ़ती सक्रियता से घबराए फिनलैंड ने अमेरिका से लड़ाकू विमानों को खरीदने का ऐलान किया है। एफ-35 फिनिश एयरफोर्स के पुराने पड़ चुके F/A-18 लड़ाकू विमानों की जगह लेंगे। फिनलैंड ने अमेरिकी हथियार निर्माता कंपनी लॉकहीड मॉर्टिन के साथ 64 एफ-35 विमानों की यह डील 9.4 बिलियन डॉलर में की है। लॉकहीड मॉर्टिन ने इन कंपनियों को पछाड़ा लॉकहीड मॉर्टिन ने यह कॉन्ट्रैक्ट स्वीडन के साब ग्रुप, अमेरिका के बोइंग, फ्रांस के डसॉल्ट और ब्रिटेन के BAE सिस्टम्स को पीछे छोड़कर हासिल किया है। फिनलैंड की सरकार ने कहा कि लॉकहीड से 2030 तक हथियारों के साथ-साथ सर्विस और मेंटीनेंस पर 8.378 बिलियन यूरो (9.44 बिलियन डॉलर) खर्च होने का अनुमान है। उन्होंने यह भी कहा कि इन विमानों के लिए हैंगर और अन्य उपकरणों के निर्माण में 777 मिलियन यूरो और वेपन पैकेज को लेकर 824 मिलियन यूरो का और खर्च आएगा। फिनलैंड ने 2015 में शुरू की थी विमान की खोज फिनलैंड के रक्षा मंत्री एंट्टी कैकोनेन ने कहा कि अलग-अलग विमानों के सैन्य प्रदर्शन की तुलना करते समय, एफ- 35 ने हमारी जरूरतों को पूरा किया। फिनलैंड ने इन विमानों के लिए 2015 के अंत में टेंडर को जारी किया था। तब वह नए विमानों से मैकडॉनेल डगलस से 1992 में खरीदे गए पुराने हॉर्नेट फाइटर को बदलना चाहता था। मैकडॉनेल डगलस अब बोइंग का हिस्सा है। खरीदने वाली फिनलैंड दुनिया का 14वां देश F-35 को चुनने वाला फिनलैंड दुनिया का 14वां देश है। फिनिश एयरफोर्स कमांडर पासी जोकिनन ने कहा कि उनका देश 2027 तक एफ-35 को चरणबद्ध तरीके से शामिल करेगा। फिनिश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स के शोधकर्ता चार्ली सैलोनियस-पास्टर्नक ने कहा कि एफ-35 का चुनाव अपने सहयोगी अमेरिका और नॉर्वे के साथ छोटे नॉर्डिक राष्ट्र के रक्षा सहयोग को मजबूत करता है। नॉर्डिक देशों में स्वीडन, फिनलैंड, डेनमार्क, नॉर्वे और आइसलैंड शामिल हैं। अमेरिका के साथ सैन्य संबंध बढ़ा रहा फिनलैंड फ़िनलैंड उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) का सदस्य नहीं है। इसके बावजूद फिनलैंड की सेना नॉर्वे और बाकी नाटो देशों के साथ अभ्यास करती रहती है। यही कारण है कि फिनलैंड ने अमेरिकी हथियारों को चुना है। 2014 में फ़िनलैंड और स्वीडन ने नाटो का सदस्य न होते हुए भी प्रशिक्षण देने और संकट की स्थितियों में नाटो की सहायता की अनुमति देने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
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