Friday, December 10, 2021

हंगरी की अदालत ने ईयू कानूनों की प्रधानता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

बुडापेस्ट, 10 दिसंबर (एपी) हंगरी की संवैधानिक अदालत ने शरणार्थियों और शरण के इच्छुक लोगों के संदर्भ में देश के बजाय यूरोपीय संघ (ईयू) के कानूनों को प्रधानता देने को चुनौती देने वाली याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी।

यह फैसला न्याय मंत्री जुडिट वर्गा द्वारा पिछले साल दिसंबर में यूरोपीय संघ की शीर्ष अदालत द्वारा दिए गए फैसले को चुनौती देने के बाद आया है। ईयू की शीर्ष अदालत ने पाया था कि हंगरी ने सर्बिया से लगती दक्षिणी सीमा पर बिना वैध तरीके से देश में दाखिल हुए लोगों को वापस भेजकर, शरण के लिए आवेदन करने के अधिकार से इनकार कर और उन्हें हिरासत में लेकर ‘ट्रांजिट जोन में रखकर’ ईयू के कानूनों की अवहेलना की है।

उल्लेखनीय है कि दक्षिणपंथी प्रधानमंत्री विक्टर ओरबन के नेतृत्व वाली हंगरी की सरकार का शरणार्थियों के मुद्दे पर ईयू से लगातार टकराव चल रहा है।

वर्गा ने अपनी याचिका में अनुरोध किया था कि वह यूरोपीय यूनियन न्याय अदालत (सीजेईयू) के उस फैसले पर राय दे जिसमें हंगरी के संविधान के अनुकूल नहीं होने के बावजूद देश में दाखिल हुए शरणार्थियों को शरण के लिए आवेदन का मौका देने को कहा गया है।

हंगरी की अदालत ने शुक्रवार को दिए फैसले में जोर दिया कि हंगरी के संविधान की व्याख्या का लक्ष्य यूरोपीय संघ की अदालत के फैसले की समीक्षा नहीं हो सकती, न ही संवैधानिक अदालत इस मामले में सुनवाई करेगी क्योंकि इसकी प्रकृति यूरोपीय संघ के कानूनों की प्रधानता की समीक्षा के स्तर तक होगी।

एपी धीरज पवनेश

पवनेश



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