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Monday, January 10, 2022

बिहार के गांव से निकलकर सिनेमा में छा जाने की कहानी, मनोज बाजपेयी पर आ रही है किताब

बॉलिवुड इंडस्ट्री में बेहतरीन ऐक्टर्स का नाम लिया जाए तो का नाम जरूर आएगा। मनोज बाजपेयी नए जमाने के उन कलाकारों में से हैं जिन्होंने कम उम्र में ही हिंदी सिनेमा में एक बड़ा कद हासिल कर लिया था। दिग्गज कलाकार और फिल्म समीक्षक उनके अभिनय का लोहा मानते हैं। दर्शक उनके नाम पर थियेटर जाते हैं और वे जानते हैं कि मनोज बाजपेयी सिर्फ अपने मन की फिल्में करते हैं। पियूष पांडे ने लिखी किताब वरिष्ठ टीवी पत्रकार पियूष पांडे ने ऐक्टर की जीवनी '' नाम की एक किताब लिखी है। मनोज बाजपेयी की ये जीवनी अभिनय को लेकर उनके जिद और जुनून की कहानी है जिसमें पाठकों को कई नई बातें पता लगेंगी। किताब में मनोज बाजपेयी से जुड़ी बातें किताब में बताया गया है कि मनोज बाजपेयी के पिता भी पुणे के फिल्म इंस्टिट्यूट में ऑडिशन का टेस्ट देने गए थे, उनके पूर्वज अंग्रेजी राज के एक दमनकारी किसान कानून की वजह से उत्तर प्रदेश के रायबरेली से चंपारण आए थे। मनोज बाजपेयी का बचपन उस गांव में बीता है जहां महात्मा गांधी ने अपने प्रसिद्ध चंपारण सत्याग्रह दौरान एक रात्रि विश्राम किया था। मनोज बाजपेयी की फिल्म 'सत्या' के भीखू म्हात्रे का चरित्र उनके गृहनगर बेतिया के एक शख्स से प्रेरित था।


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