पूर्वी यूक्रेन में संघर्ष वाले क्षेत्र में सोमवार को जारी गोलाबारी के बीच यह संभावना बनी है। वहीं पश्चिमी शक्तियों को इस बात का डर सता रहा है कि इस गोलाबारी से व्यापक स्तर पर युद्ध शुरू हो सकता है।
हालांकि, अगर रूस, यूक्रेन पर आक्रमण करता है तो दोनों देशों के बीच यह बैठक रद्द कर दी जाएगी। इस संबंध में अमेरिका पहले से चेतावनी दे रहा है कि रूस ने यूक्रेन पर हमला करने की ठान ली है।
हमले की स्थिति बनने के बावजूद उम्मीद की जा रही है कि कूटनीति इस भीषण संघर्ष को टालने में कामयाब होगी, क्योंकि युद्ध हुआ तो बड़ी संख्या में लोग हताहत होंगे और बड़े पैमाने पर रूस से मिलने वाली ऊर्जा पर आधारित यूरोप की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचेगा।
रूस ने यूक्रेन की सीमाओं पर तीन ओर करीब 1,50,000 सैनिक एकत्र कर लिए हैं जो शीत युद्ध के बाद सबसे बड़ी तैनाती है। वहीं, पश्चिमी देशों के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन यूक्रेन पर हमले के लिए बस कारण तलाश रहे हैं, क्योंकि उसने (यूक्रेन) रूस के साथ आने से मना कर दिया है।
हालांकि, मास्को ने यूक्रेन पर हमले की योजना से इंकार किया है, लेकिन चाहता है कि पश्चिमी देश इसकी गारंटी दें कि नाटो यूक्रेन सहित पूर्व सोवियत संघ के अन्य देशों को संगठन में बतौर सदस्य शामिल नहीं करेगा। रूस ने यूक्रेन में नाटो द्वारा हथियारों की तैनाती रोकने और पूर्वी यूरोप में तैनात बलों को वापस बुलाने की मांग रखी है।
एपी अर्पणा सुभाष
सुभाष
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