वाशिंगटन, 18 अक्टूबर (भाषा) विश्व बैंक ने 1960 की सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच असहमति और मतभेदों को देखते हुए किशनगंगा और रातले जलविद्युत संयंत्रों के संबंध में मध्यस्थता न्यायालय के एक अध्यक्ष और एक ‘तटस्थ विशेषज्ञ’ को नियुक्त किया है। विश्व बैंक ने नियुक्तियों की घोषणा करते हुए सोमवार को कहा कि उसे भरोसा है कि तटस्थ विशेषज्ञ और मध्यस्थता न्यायालय के सदस्यों के रूप में नियुक्त अत्यधिक योग्य विशेषज्ञ संधि के तहत मिले अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले आदेश पर निष्पक्ष और सावधानीपूर्वक विचार करेंगे। विश्व बैंक ने एक बयान में बताया कि
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